Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.65.62: योग-योगीश्वर! हम न तो आपकी संख्या जानते हैं, न ही आपका परिमाण। हम आपके तेज, बल और पराक्रम को नहीं जानते। हम यह भी नहीं जानते कि आप कैसे प्रकट होते हैं॥ 62॥ | mahabharat अध्याय 6.65: धृतराष्ट्र-संजय-संवादके प्रसंगमें दुर्योधनके द्वारा पाण्डवोंकी विजयका कारण पूछनेपर भीष्मका ब्रह्माजीके द्वारा की हुई भगवत्-स्तुतिका कथन । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न संख्यानं परीमाणं न तेजो न पराक्रमम्।
न बलं योगयोगीश जानीमस्ते न सम्भवम्॥ ६२॥
अनुवाद
योग-योगीश्वर! हम न तो आपकी संख्या जानते हैं, न ही आपका परिमाण। हम आपके तेज, बल और पराक्रम को नहीं जानते। हम यह भी नहीं जानते कि आप कैसे प्रकट होते हैं॥ 62॥
Yog-Yogishwar! We neither know your number nor your magnitude. We do not know your brilliance, power and strength. We do not even know how you appear.॥ 62॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥