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mahabharat 6.65.60: तप और सत्य ही आपके बल हैं और धर्म और कर्म ही आपके स्वरूप हैं। अग्नि आपका तेज है, वायु आपकी श्वास है और जल आपका पसीना है॥60॥   |   mahabharat अध्याय 6.65: धृतराष्ट्र-संजय-संवादके प्रसंगमें दुर्योधनके द्वारा पाण्डवोंकी विजयका कारण पूछनेपर भीष्मका ब्रह्माजीके द्वारा की हुई भगवत्-स्तुतिका कथन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.65.60 
बलं तपश्च सत्यं च कर्म धर्मात्मकं तव।
तेजोऽग्नि: पवन: श्वास आपस्ते स्वेदसम्भवा:॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
तप और सत्य ही आपके बल हैं और धर्म और कर्म ही आपके स्वरूप हैं। अग्नि आपका तेज है, वायु आपकी श्वास है और जल आपका पसीना है॥60॥
 
Penance and truth are your strength and Dharma and Karma are your form. Fire is your brilliance, air is your breath and water is your sweat.॥ 60॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)