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mahabharat 6.65.56: आप स्वयंभू हैं, आपका सौभाग्य महान है। आप इस कल्प के नाश करने वाले और शुद्ध परब्रह्म हैं। आपका ध्यान करने से अंतःकरण में आपका दर्शन होता है, आप समस्त प्राणियों के प्रिय परब्रह्म हैं, आपकी जय हो। ॥ 56॥   |   mahabharat अध्याय 6.65: धृतराष्ट्र-संजय-संवादके प्रसंगमें दुर्योधनके द्वारा पाण्डवोंकी विजयका कारण पूछनेपर भीष्मका ब्रह्माजीके द्वारा की हुई भगवत्-स्तुतिका कथन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 65: धृतराष्ट्र-संजय-संवादके प्रसंगमें दुर्योधनके द्वारा पाण्डवोंकी विजयका कारण पूछनेपर भीष्मका ब्रह्माजीके द्वारा की हुई भगवत्-स्तुतिका कथन  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  6.65.56 
आत्मयोने महाभाग कल्पसंक्षेप तत्पर।
उद्भावनमनोभाव जय ब्रह्म जनप्रिय॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
आप स्वयंभू हैं, आपका सौभाग्य महान है। आप इस कल्प के नाश करने वाले और शुद्ध परब्रह्म हैं। आपका ध्यान करने से अंतःकरण में आपका दर्शन होता है, आप समस्त प्राणियों के प्रिय परब्रह्म हैं, आपकी जय हो। ॥ 56॥
 
You are Swayambhu (self-born), your good fortune is great. You are the destroyer of this kalpa and are the pure Supreme Brahman. By meditating on you, you appear in the inner conscience, you are the beloved Supreme Brahman of all living beings, victory to you. ॥ 56॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)