Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.65.55: पूर्ण योगस्वरूप परमात्मा! आपका स्वरूप रहस्यमय होते हुए भी स्पष्ट है। अब तक जो कुछ हुआ है और जो कुछ हो रहा है, वह सब आपका ही स्वरूप है। आप समस्त भूतों के मूल कारण और जगत के तत्त्वों के स्वामी हैं। भूतभावन! आपकी जय हो।॥55॥ | mahabharat अध्याय 6.65: धृतराष्ट्र-संजय-संवादके प्रसंगमें दुर्योधनके द्वारा पाण्डवोंकी विजयका कारण पूछनेपर भीष्मका ब्रह्माजीके द्वारा की हुई भगवत्-स्तुतिका कथन । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गुह्यात्मन् सर्वयोगात्मन् स्फुटं सम्भूतसम्भव।
भूताद्य लोकतत्त्वेश जय भूतविभावन॥ ५५॥
अनुवाद
पूर्ण योगस्वरूप परमात्मा! आपका स्वरूप रहस्यमय होते हुए भी स्पष्ट है। अब तक जो कुछ हुआ है और जो कुछ हो रहा है, वह सब आपका ही स्वरूप है। आप समस्त भूतों के मूल कारण और जगत के तत्त्वों के स्वामी हैं। भूतभावन! आपकी जय हो।॥55॥
Purna Yogaswaroop Parmatman! Your form is mysterious yet clear. Whatever has happened till now and whatever is happening, all is your form. You are the root cause of all beings and the master of the world elements. Bhootbhavan! Victory to you. ॥ 55॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥