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mahabharat 6.65.54: हे ब्रह्मन्! आप अनन्त ज्ञानस्वरूप, सनातन और समस्त प्राणियों के रचयिता हैं। आपको कुछ भी करने को शेष नहीं है, आपकी बुद्धि निर्मल है, आप धर्म के तत्त्व को जानने वाले और विजय देने वाले हैं।॥54॥   |   mahabharat अध्याय 6.65: धृतराष्ट्र-संजय-संवादके प्रसंगमें दुर्योधनके द्वारा पाण्डवोंकी विजयका कारण पूछनेपर भीष्मका ब्रह्माजीके द्वारा की हुई भगवत्-स्तुतिका कथन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.65.54 
अनन्तविदित ब्रह्मन् नित्य भूतविभावन।
कृतकार्य कृतप्रज्ञ धर्मज्ञ विजयावह॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
हे ब्रह्मन्! आप अनन्त ज्ञानस्वरूप, सनातन और समस्त प्राणियों के रचयिता हैं। आपको कुछ भी करने को शेष नहीं है, आपकी बुद्धि निर्मल है, आप धर्म के तत्त्व को जानने वाले और विजय देने वाले हैं।॥54॥
 
O Brahman! You are the embodiment of infinite knowledge, eternal and the creator of all beings. You have nothing left to do, your intellect is pure, you know the essence of religion and give victory. ॥ 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)