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mahabharat 6.65.51: आप समस्त शुभ गुणों से युक्त हैं, जगत् के स्वरूप हैं और रोग से रहित हैं; आपकी जय हो। हे महाबाहु विश्वेश्वर, जगत् की कामनाओं को पूर्ण करने वाले! आपकी जय हो।॥51॥   |   mahabharat अध्याय 6.65: धृतराष्ट्र-संजय-संवादके प्रसंगमें दुर्योधनके द्वारा पाण्डवोंकी विजयका कारण पूछनेपर भीष्मका ब्रह्माजीके द्वारा की हुई भगवत्-स्तुतिका कथन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 65: धृतराष्ट्र-संजय-संवादके प्रसंगमें दुर्योधनके द्वारा पाण्डवोंकी विजयका कारण पूछनेपर भीष्मका ब्रह्माजीके द्वारा की हुई भगवत्-स्तुतिका कथन  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  6.65.51 
जय सर्वगुणोपेत विश्वमूर्ते निरामय।
विश्वेश्वर महाबाहो जय लोकार्थतत्पर॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
आप समस्त शुभ गुणों से युक्त हैं, जगत् के स्वरूप हैं और रोग से रहित हैं; आपकी जय हो। हे महाबाहु विश्वेश्वर, जगत् की कामनाओं को पूर्ण करने वाले! आपकी जय हो।॥51॥
 
You are endowed with all auspicious qualities, are the image of the world and are free from disease; victory to you. O mighty-armed Vishwaeshwara, who fulfills the desires of the world! Victory to you. ॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)