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mahabharat 6.65.49-50: आपकी नाभि से प्रथम कमल उत्पन्न हुआ है, आपके नेत्र बड़े हैं, आप जगत के अधिपतियों के भी देव हैं; आपकी जय हो। भूत, वर्तमान और भविष्य के स्वामी! आपकी जय हो। आपका स्वरूप सौम्य है, मैं स्वयंभू ब्रह्मा आपका पुत्र हूँ। आप असंख्य गुणों के आधार और सबको आश्रय देने वाले हैं, आपकी जय हो। शार्ङ्ग धनुष धारण करने वाले नारायण! आपकी महिमा को पार करना अत्यंत कठिन है, आपकी जय हो।॥ 49-50॥   |   mahabharat अध्याय 6.65: धृतराष्ट्र-संजय-संवादके प्रसंगमें दुर्योधनके द्वारा पाण्डवोंकी विजयका कारण पूछनेपर भीष्मका ब्रह्माजीके द्वारा की हुई भगवत्-स्तुतिका कथन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.65.49-50 
पद्मगर्भ विशालाक्ष जय लोकेश्वरेश्वर।
भूतभव्यभवन्नाथ जय सौम्यात्मजात्मज॥ ४९॥
असंख्येयगुणाधार जय सर्वपरायण।
नारायण सुदुष्पार जय शार्ङ्गधनुर्धर॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
आपकी नाभि से प्रथम कमल उत्पन्न हुआ है, आपके नेत्र बड़े हैं, आप जगत के अधिपतियों के भी देव हैं; आपकी जय हो। भूत, वर्तमान और भविष्य के स्वामी! आपकी जय हो। आपका स्वरूप सौम्य है, मैं स्वयंभू ब्रह्मा आपका पुत्र हूँ। आप असंख्य गुणों के आधार और सबको आश्रय देने वाले हैं, आपकी जय हो। शार्ङ्ग धनुष धारण करने वाले नारायण! आपकी महिमा को पार करना अत्यंत कठिन है, आपकी जय हो।॥ 49-50॥
 
The first lotus has originated from your navel, your eyes are big, you are the God of the lords of the world; victory to you. Lord of the past, present and future! Victory to you. Your form is gentle, I, Swayambhu Brahma, am your son. You are the basis of innumerable virtues and the one who gives shelter to everyone, victory to you. Narayana, the bearer of the Sharnga bow! It is very difficult to surpass your glory, victory to you.॥ 49-50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)