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mahabharat 6.65.48: हे विश्वरूप महादेव! हे लोक-कल्याण में निरन्तर लगे रहने वाले परमपिता परमेश्वर! आपकी जय हो। हे सर्वव्यापी योगेश्वर! आपकी जय हो। हे योग के आदि और अंत! आपकी जय हो।॥ 48॥   |   mahabharat अध्याय 6.65: धृतराष्ट्र-संजय-संवादके प्रसंगमें दुर्योधनके द्वारा पाण्डवोंकी विजयका कारण पूछनेपर भीष्मका ब्रह्माजीके द्वारा की हुई भगवत्-स्तुतिका कथन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.65.48 
जय विश्व महादेव जय लोकहिते रत।
जय योगीश्वर विभो जय योगपरावर॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
हे विश्वरूप महादेव! हे लोक-कल्याण में निरन्तर लगे रहने वाले परमपिता परमेश्वर! आपकी जय हो। हे सर्वव्यापी योगेश्वर! आपकी जय हो। हे योग के आदि और अंत! आपकी जय हो।॥ 48॥
 
Vishwaroop Mahadev! Victory to you, the Supreme God who is always engaged in the welfare of the people! Victory to you. Omnipresent Yogeshwar! Victory to you. The beginning and end of Yoga! Victory to you.॥ 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)