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mahabharat 6.65.46: ब्रह्मवेत्ताओं में श्रेष्ठ, परम धार्मिक पुरुष, जगत् के रचयिता ब्रह्माजी ने उस ज्योतिर्मय परमेश्वर की उनके वास्तविक स्वरूप से पूजा और स्तुति की ॥46॥   |   mahabharat अध्याय 6.65: धृतराष्ट्र-संजय-संवादके प्रसंगमें दुर्योधनके द्वारा पाण्डवोंकी विजयका कारण पूछनेपर भीष्मका ब्रह्माजीके द्वारा की हुई भगवत्-स्तुतिका कथन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.65.46 
यथावच्च तमभ्यर्च्य ब्रह्मा ब्रह्मविदां वर:।
जगाद जगत: स्रष्टा परं परमधर्मवित्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मवेत्ताओं में श्रेष्ठ, परम धार्मिक पुरुष, जगत् के रचयिता ब्रह्माजी ने उस ज्योतिर्मय परमेश्वर की उनके वास्तविक स्वरूप से पूजा और स्तुति की ॥46॥
 
Brahmaji, the best among the Brahma experts, the supremely religious person, the creator of the world, worshiped and praised that luminous Supreme Being in his true form. 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)