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mahabharat 6.65.45: ऋषियों और देवात्मा ब्रह्मा को हाथ जोड़कर खड़े देखकर वह भी उस परम अद्भुत तेज को देखकर हाथ जोड़कर खड़ा हो गया।   |   mahabharat अध्याय 6.65: धृतराष्ट्र-संजय-संवादके प्रसंगमें दुर्योधनके द्वारा पाण्डवोंकी विजयका कारण पूछनेपर भीष्मका ब्रह्माजीके द्वारा की हुई भगवत्-स्तुतिका कथन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.65.45 
ऋषयस्त्वथ देवाश्च दृष्ट्वा ब्रह्माणमुत्थितम्।
स्थिता: प्राञ्जलय: सर्वे पश्यन्तो महदद्भुतम्॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
ऋषियों और देवात्मा ब्रह्मा को हाथ जोड़कर खड़े देखकर वह भी उस परम अद्भुत तेज को देखकर हाथ जोड़कर खड़ा हो गया।
 
Seeing the sages and the divine Brahma standing with folded hands, he too stood with folded hands after seeing the most wonderful radiance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)