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mahabharat 6.65.44: मन को वश में रखने वाले ब्रह्माजी ने ध्यान के द्वारा तत्व को जानकर हाथ जोड़कर प्रसन्न मन से परम पुरुष परमेश्वर को प्रणाम किया ॥ 44॥   |   mahabharat अध्याय 6.65: धृतराष्ट्र-संजय-संवादके प्रसंगमें दुर्योधनके द्वारा पाण्डवोंकी विजयका कारण पूछनेपर भीष्मका ब्रह्माजीके द्वारा की हुई भगवत्-स्तुतिका कथन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 65: धृतराष्ट्र-संजय-संवादके प्रसंगमें दुर्योधनके द्वारा पाण्डवोंकी विजयका कारण पूछनेपर भीष्मका ब्रह्माजीके द्वारा की हुई भगवत्-स्तुतिका कथन  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  6.65.44 
ध्यानेनावेद्य तद् ब्रह्मा कृत्वा च नियतोऽञ्जलिम्।
नमश्चकार हृष्टात्मा पुरुषं परमेश्वरम्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
मन को वश में रखने वाले ब्रह्माजी ने ध्यान के द्वारा तत्व को जानकर हाथ जोड़कर प्रसन्न मन से परम पुरुष परमेश्वर को प्रणाम किया ॥ 44॥
 
Brahma, who had kept his mind under control, having understood the truth through meditation, folded his hands and with a happy mind bowed down to the Supreme Being, the Supreme Lord. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)