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श्लोक  6.65.34 
तत्र मे संशयो जातस्तन्ममाचक्ष्व पृच्छत:।
यं समाश्रित्य कौन्तेया जयन्त्यस्मान् क्षणे क्षणे॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
इस विषय में मुझे बड़ा संदेह है, अतः कृपया मेरे प्रश्नानुसार इसका उत्तर दीजिए। ये कुन्तीपुत्र किसका आश्रय लेकर हम पर प्रतिक्षण विजय प्राप्त कर रहे हैं?
 
I have a big doubt in this matter; therefore please answer it as per my question. Taking shelter of whom these sons of Kunti are getting victory over us every moment. 34.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)