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mahabharat 6.65.25: विदुर, भीष्म, महात्मा द्रोण और मैंने तुम्हें बार-बार मना किया है, परंतु तुम कभी समझ नहीं पाए॥ 25॥   |   mahabharat अध्याय 6.65: धृतराष्ट्र-संजय-संवादके प्रसंगमें दुर्योधनके द्वारा पाण्डवोंकी विजयका कारण पूछनेपर भीष्मका ब्रह्माजीके द्वारा की हुई भगवत्-स्तुतिका कथन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.65.25 
विदुरेणाथ भीष्मेण द्रोणेन च महात्मना।
तथा मया चाप्यसकृद् वार्यमाणो न बुध्यसे॥ २५॥
 
 
अनुवाद
विदुर, भीष्म, महात्मा द्रोण और मैंने तुम्हें बार-बार मना किया है, परंतु तुम कभी समझ नहीं पाए॥ 25॥
 
Vidura, Bhishma, Mahatma Drona and I have repeatedly forbidden you, but you were never able to understand.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)