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mahabharat 6.65.23: हे जनेश्वर! आप जो निरन्तर पापकर्म करते रहे हैं, उसी पापकर्म का यह भयंकर फल हुआ है॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 6.65: धृतराष्ट्र-संजय-संवादके प्रसंगमें दुर्योधनके द्वारा पाण्डवोंकी विजयका कारण पूछनेपर भीष्मका ब्रह्माजीके द्वारा की हुई भगवत्-स्तुतिका कथन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.65.23 
तस्य पापस्य सततं क्रियमाणस्य कर्मण:।
साम्प्रतं सुमहद् घोरं फलं प्राप्तं जनेश्वर॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे जनेश्वर! आप जो निरन्तर पापकर्म करते रहे हैं, उसी पापकर्म का यह भयंकर फल हुआ है॥ 23॥
 
O Janeshwar! The same sinful act which you have been committing continuously has now brought about this dreadful result.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)