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mahabharat 6.65.20-22: हे जनेश्वर! आपके पुत्रों ने पाण्डवों के साथ नीच मनुष्यों के समान क्रूरतापूर्वक व्यवहार किया है और उनके साथ छल किया है, किन्तु पाण्डवों ने आपके पुत्रों के समस्त अपराधों को भुलाकर उन दोषों को सदैव छिपाया है। हे महाराज, पाण्डु के ज्येष्ठ भ्राता! ऐसा होते हुए भी आपके पुत्र इन पाण्डवों का अधिक आदर नहीं करते। 20-22।   |   mahabharat अध्याय 6.65: धृतराष्ट्र-संजय-संवादके प्रसंगमें दुर्योधनके द्वारा पाण्डवोंकी विजयका कारण पूछनेपर भीष्मका ब्रह्माजीके द्वारा की हुई भगवत्-स्तुतिका कथन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.65.20-22 
सुबहूनि नृशंसानि पुत्रैस्तव जनेश्वर॥ २०॥
निकृतानीह पाण्डूनां नीचैरिव यथा नरै:।
सर्वं च तदनादृत्य पुत्राणां तव किल्बिषम्॥ २१॥
सापह्नवा: सदैवासन् पाण्डवा: पाण्डुपूर्वज।
न चैतान् बहु मन्यन्ते पुत्रास्तव विशाम्पते॥ २२॥
 
 
अनुवाद
हे जनेश्वर! आपके पुत्रों ने पाण्डवों के साथ नीच मनुष्यों के समान क्रूरतापूर्वक व्यवहार किया है और उनके साथ छल किया है, किन्तु पाण्डवों ने आपके पुत्रों के समस्त अपराधों को भुलाकर उन दोषों को सदैव छिपाया है। हे महाराज, पाण्डु के ज्येष्ठ भ्राता! ऐसा होते हुए भी आपके पुत्र इन पाण्डवों का अधिक आदर नहीं करते। 20-22।
 
O Janeshwar! Your sons have behaved cruelly and cheated the Pandavas like lowly human beings, but the Pandavas have always covered up those faults, forgetting all the crimes of your sons. O Maharaja, the elder brother of Pandu! Despite this, your sons do not give much respect to these Pandavas. 20–22.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)