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mahabharat 6.65.2: सुत संजय! मैं अपने पुत्रों की सब प्रकार से पराजय सुनकर और भी अधिक चिन्ताग्रस्त हो रहा हूँ। मैं सोच रहा हूँ कि वे किस प्रकार विजयी होंगे॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 6.65: धृतराष्ट्र-संजय-संवादके प्रसंगमें दुर्योधनके द्वारा पाण्डवोंकी विजयका कारण पूछनेपर भीष्मका ब्रह्माजीके द्वारा की हुई भगवत्-स्तुतिका कथन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 65: धृतराष्ट्र-संजय-संवादके प्रसंगमें दुर्योधनके द्वारा पाण्डवोंकी विजयका कारण पूछनेपर भीष्मका ब्रह्माजीके द्वारा की हुई भगवत्-स्तुतिका कथन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  6.65.2 
पुत्राणां च पराभावं श्रुत्वा संजय सर्वश:।
चिन्ता मे महती सूत भविष्यति कथं त्विति॥ २॥
 
 
अनुवाद
सुत संजय! मैं अपने पुत्रों की सब प्रकार से पराजय सुनकर और भी अधिक चिन्ताग्रस्त हो रहा हूँ। मैं सोच रहा हूँ कि वे किस प्रकार विजयी होंगे॥ 2॥
 
Sut Sanjay! I am getting more and more worried after hearing about the defeat of my sons in every way. I wonder how they will be victorious.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)