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mahabharat 6.65.15: संजय ने कहा, "हे राजन! ध्यानपूर्वक सुनो और स्वयं ही पाण्डवों के बल तथा अपनी पराजय का कारण निश्चित करो। पाण्डव किसी मन्त्र के प्रभाव में नहीं हैं और न ही वे कोई माया करते हैं।"   |   mahabharat अध्याय 6.65: धृतराष्ट्र-संजय-संवादके प्रसंगमें दुर्योधनके द्वारा पाण्डवोंकी विजयका कारण पूछनेपर भीष्मका ब्रह्माजीके द्वारा की हुई भगवत्-स्तुतिका कथन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.65.15 
संजय उवाच
शृणु राजन्नवहित: श्रुत्वा चैवावधारय।
नैव मन्त्रकृतं किंचिन्नैव मायां तथाविधाम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा, "हे राजन! ध्यानपूर्वक सुनो और स्वयं ही पाण्डवों के बल तथा अपनी पराजय का कारण निश्चित करो। पाण्डव किसी मन्त्र के प्रभाव में नहीं हैं और न ही वे कोई माया करते हैं।"
 
Sanjaya said, "O King! Listen carefully and decide for yourself the strength of the Pandavas and the reason for your defeat. The Pandavas are not under the influence of any mantras and neither do they perform any such illusion." 15.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)