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श्लोक  6.65.1 
धृतराष्ट्र उवाच
भयं मे सुमहज्जातं विस्मयश्चैव संजय।
श्रुत्वा पाण्डुकुमाराणां कर्म देवै: सुदुष्करम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले - संजय! मैं पाण्डवों के उन पराक्रमों को सुनकर अत्यन्त भयभीत और विस्मित हूँ, जो देवताओं के लिए भी कठिन थे।
 
Dhritarashtra said - Sanjay! I am very afraid and astonished to hear about the feats of the Pandavas which were difficult even for the gods.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)