श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 64: भीमसेन और घटोत्कचका पराक्रम, कौरवोंकी पराजय तथा चौथे दिनके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  6.64.87 
तत: कृत्वा विधिं सर्वं शिबिरस्य यथाविधि।
प्रदध्यौ शोकसंतप्तो भ्रातृव्यसनकर्शित:॥ ८७॥
 
 
अनुवाद
शिविरके लिए आवश्यक सब प्रबंध करके वह अपने भाइयोंकी मृत्युसे दुःखी और शोकाकुल हो गया और चिन्तामें डूब गया ॥87॥
 
Having made all the necessary arrangements for the camp, he was saddened and grief-stricken by the death of his brothers and was drowned in worry. ॥ 87॥
 
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि भीष्मवधपर्वणि चतुर्थदिवसावहारे चतु:षष्टितमोऽध्याय:॥ ६४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत भीष्मवधपर्वमें चौथे दिनका युद्धविरामविषयक चौसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६४॥

[दाक्षिणात्य अधिक पाठका १/२ श्लोक मिलाकर कुल ८७ १/२ श्लोक हैं।]
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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