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mahabharat 6.64.86-87h: राजा दुर्योधन अपने भाइयों की मृत्यु से अत्यंत दुःखी हुआ। उसकी आँखों से आँसू बहते रहे और वह दो घण्टों तक अत्यन्त चिन्ताग्रस्त रहा।   |   mahabharat अध्याय 6.64: भीमसेन और घटोत्कचका पराक्रम, कौरवोंकी पराजय तथा चौथे दिनके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 64: भीमसेन और घटोत्कचका पराक्रम, कौरवोंकी पराजय तथा चौथे दिनके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 86-87h
 
 
श्लोक  6.64.86-87h 
दुर्योधनस्तु नृपतिर्दीनो भ्रातृवधेन च॥ ८६॥
मुहूर्तं चिन्तयामास बाष्पशोकसमाकुल:।
 
 
अनुवाद
राजा दुर्योधन अपने भाइयों की मृत्यु से अत्यंत दुःखी हुआ। उसकी आँखों से आँसू बहते रहे और वह दो घण्टों तक अत्यन्त चिन्ताग्रस्त रहा।
 
King Duryodhan was extremely saddened by the death of his brothers. He was shedding tears from his eyes and was very worried for two hours. 86 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)