श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 64: भीमसेन और घटोत्कचका पराक्रम, कौरवोंकी पराजय तथा चौथे दिनके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  6.64.82 
शरविक्षतगात्रास्तु पाण्डुपुत्रा महारथा:।
युद्धे सुमनसो भूत्वा जग्मु: स्वशिबिरं प्रति॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
युद्ध में महाबली पाण्डवों के शरीर भी बाणों से क्षत-विक्षत हो गए थे, फिर भी वे प्रसन्नचित्त होकर अपने शिविर में लौट आए ॥82॥
 
The bodies of the great Pandavas were also mutilated by arrows in the war, yet they returned to their camp in a happy mood. 82॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)