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mahabharat 6.64.75-76: ऐसी स्थिति में तो वज्रधारी इन्द्र भी उसे युद्ध में परास्त नहीं कर सकते। वह आक्रमण करने में कुशल और लक्ष्य भेदने में सफल है। इधर हमारे वाहन थक गए हैं। हम दिन भर पांडवों और पांचालों के आक्रमण से घायल और घायल होते रहे हैं। 75-76।   |   mahabharat अध्याय 6.64: भीमसेन और घटोत्कचका पराक्रम, कौरवोंकी पराजय तथा चौथे दिनके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 64: भीमसेन और घटोत्कचका पराक्रम, कौरवोंकी पराजय तथा चौथे दिनके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 75-76
 
 
श्लोक  6.64.75-76 
नैष शक्यो युधा जेतुमपि वज्रभृता स्वयम्॥ ७५॥
लब्धलक्ष्य: प्रहारी च वयं च श्रान्तवाहना:।
पाञ्चालै: पाण्डवेयैश्च दिवसं क्षतविक्षता:॥ ७६॥
 
 
अनुवाद
ऐसी स्थिति में तो वज्रधारी इन्द्र भी उसे युद्ध में परास्त नहीं कर सकते। वह आक्रमण करने में कुशल और लक्ष्य भेदने में सफल है। इधर हमारे वाहन थक गए हैं। हम दिन भर पांडवों और पांचालों के आक्रमण से घायल और घायल होते रहे हैं। 75-76।
 
‘In such a condition, even Indra, the bearer of thunderbolt, cannot defeat him in battle. He is skilled in attacking and successful in hitting the target. Here our vehicles are tired. We have been getting injured and wounded by the Pandavas and Panchalas throughout the day. 75-76.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)