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mahabharat 6.64.74-75h: इस समय मैं दुष्टबुद्धि घटोत्कच से युद्ध करना नहीं चाहता; क्योंकि वह बल और पराक्रम से परिपूर्ण है तथा इस समय उसके साथ शक्तिशाली सहायक भी हैं।   |   mahabharat अध्याय 6.64: भीमसेन और घटोत्कचका पराक्रम, कौरवोंकी पराजय तथा चौथे दिनके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 64: भीमसेन और घटोत्कचका पराक्रम, कौरवोंकी पराजय तथा चौथे दिनके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 74-75h
 
 
श्लोक  6.64.74-75h 
न रोचते मे संग्रामो हैडिम्बेन दुरात्मना॥ ७४॥
बलवीर्यसमाविष्ट: ससहायश्च साम्प्रतम्।
 
 
अनुवाद
इस समय मैं दुष्टबुद्धि घटोत्कच से युद्ध करना नहीं चाहता; क्योंकि वह बल और पराक्रम से परिपूर्ण है तथा इस समय उसके साथ शक्तिशाली सहायक भी हैं।
 
‘At this time I do not like to fight with the evil-minded Ghatotkacha; because he is full of strength and valour and at this time he has got powerful helpers as well.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)