Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.64.61-62: वे सभी अपने दाँतों से भगदत्त के हाथी को पीड़ा देने लगे। वह बाणों से बुरी तरह घायल हो गया था; इसलिए इन हाथियों द्वारा पीड़ा दिए जाने पर वह पीड़ा से व्याकुल हो गया और ज़ोर-ज़ोर से चीखने लगा। उसकी आवाज़ इंद्र के वज्र की गड़गड़ाहट के समान प्रतीत हो रही थी। 61-62 | mahabharat अध्याय 6.64: भीमसेन और घटोत्कचका पराक्रम, कौरवोंकी पराजय तथा चौथे दिनके युद्धकी समाप्ति । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वे सभी अपने दाँतों से भगदत्त के हाथी को पीड़ा देने लगे। वह बाणों से बुरी तरह घायल हो गया था; इसलिए इन हाथियों द्वारा पीड़ा दिए जाने पर वह पीड़ा से व्याकुल हो गया और ज़ोर-ज़ोर से चीखने लगा। उसकी आवाज़ इंद्र के वज्र की गड़गड़ाहट के समान प्रतीत हो रही थी। 61-62
All of them began tormenting Bhagadatta's elephant with their teeth. He had been badly wounded by the arrows; therefore, being tormented by these elephants, he became distraught with pain and began to scream loudly. His voice seemed like the rumbling of Indra's thunderbolt. 61-62.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥