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mahabharat 6.64.58-59h: महाराज! वे सभी बड़े-बड़े दानव तीन स्थानों से बड़े गर्व से भरे हुए बह रहे थे, वे तेज, बल और पराक्रम से परिपूर्ण थे, तथा बड़े पराक्रमी और शूरवीर थे।   |   mahabharat अध्याय 6.64: भीमसेन और घटोत्कचका पराक्रम, कौरवोंकी पराजय तथा चौथे दिनके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 64: भीमसेन और घटोत्कचका पराक्रम, कौरवोंकी पराजय तथा चौथे दिनके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 58-59h
 
 
श्लोक  6.64.58-59h 
महाकायास्त्रिधा राजन् प्रस्रवन्तो मदं बहु॥ ५८॥
तेजोवीर्यबलोपेता महाबलपराक्रमा:।
 
 
अनुवाद
महाराज! वे सभी बड़े-बड़े दानव तीन स्थानों से बड़े गर्व से भरे हुए बह रहे थे, वे तेज, बल और पराक्रम से परिपूर्ण थे, तथा बड़े पराक्रमी और शूरवीर थे।
 
King! All those huge giants were flowing with lots of pride from three places and were full of brilliance, power and strength and were very powerful and valiant. 58 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)