श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 64: भीमसेन और घटोत्कचका पराक्रम, कौरवोंकी पराजय तथा चौथे दिनके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 49-50h
 
 
श्लोक  6.64.49-50h 
संचोदितो मदस्रावी भगदत्तेन वारण:।
अभ्यधावत तान् सर्वान् कालोत्सृष्ट इवान्तक:॥ ४९॥
द्विगुणं जवमास्थाय कम्पयंश्चरणैर्महीम्।
 
 
अनुवाद
भगदत्त की प्रेरणा से उस मदोन्मत्त हाथी ने काल द्वारा भेजे गए यमराज के समान अपनी गति दुगुनी कर ली और अपने पैरों की ध्वनि से पृथ्वी को कंपाता हुआ उनकी ओर दौड़ा।
 
Inspired by Bhagadatta, that intoxicated elephant, like Yamaraja sent by time, doubled his speed and ran towards them, shaking the earth with the sound of his feet.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)