अभिमन्युमुखास्तत् तु नामृष्यन्त महारथा:।
भीमस्याच्छादनं संख्ये स्वबाहुबलमाश्रिता:॥ ४५॥
त एनं शरवर्षेण समन्तात् पर्यवारयन्।
गजं च शरवृष्टॺा तु बिभिदुस्ते समन्तत:॥ ४६॥
अनुवाद
उस समय अभिमन्यु जैसे महारथी भीम को इस प्रकार बाणों से आच्छादित होते हुए सहन नहीं कर सके। उन्होंने अपने बाहुबल का उपयोग करके युद्ध में भगदत्त पर चारों ओर से बाणों की वर्षा करके उसे रोक दिया। उन्होंने बाणों की वर्षा से भगदत्त के हाथी को भी चारों ओर से बींध डाला।
At that time, the mighty warriors like Abhimanyu could not tolerate Bhima being covered with arrows in this manner. They resorted to their physical strength and started showering arrows on Bhagadatta from all sides in the battle and stopped him. They also pierced Bhagadatta's elephant from all sides with their shower of arrows.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥