श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 64: भीमसेन और घटोत्कचका पराक्रम, कौरवोंकी पराजय तथा चौथे दिनके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  6.64.44 
आपतन्नेव च रणे भीमसेनं शिलीमुखै:।
अदृश्यं समरे चक्रे जीमूत इव भास्करम्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
युद्ध भूमि में आते ही उसने अपने बाणों से भीमसेन को अदृश्य कर दिया, मानो सूर्य बादलों से ढक गया हो।
 
As soon as he came to the battle field, he made Bhimasena invisible with his arrows, as if the sun was covered by clouds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)