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mahabharat 6.64.34-35h: तत्पश्चात् सुषेण को मारकर उसे मृत्युलोक में भेज दिया और उग्र का कुंडलित चन्द्रमा का सिर कौए के प्रहार से कटकर पृथ्वी पर गिर पड़ा ॥34 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 6.64: भीमसेन और घटोत्कचका पराक्रम, कौरवोंकी पराजय तथा चौथे दिनके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 64: भीमसेन और घटोत्कचका पराक्रम, कौरवोंकी पराजय तथा चौथे दिनके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 34-35h
 
 
श्लोक  6.64.34-35h 
सुषेणं च ततो हत्वा प्रेषयामास मृत्यवे।
उग्रस्य सशिरस्त्राणं शिरश्चन्द्रोपमं भुवि॥ ३४॥
पातयामास भल्लेन कुण्डलाभ्यां विभूषितम्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् सुषेण को मारकर उसे मृत्युलोक में भेज दिया और उग्र का कुंडलित चन्द्रमा का सिर कौए के प्रहार से कटकर पृथ्वी पर गिर पड़ा ॥34 1/2॥
 
Thereafter, after killing Sushen, he sent him to the abode of death and Ugra's coiled Chandrapam head was cut off along with its headdress by a crowbar and fell on the earth. 34 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)