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mahabharat 6.64.27: तदनन्तर महाधनुर्धर पाण्डुपुत्र भीमसेन ने राजा शल्य को सुवर्णमय पंखवाले पच्चीस बाणों से घायल कर दिया। उन बाणों से घायल होकर वह युद्धभूमि से भाग गया। 27॥   |   mahabharat अध्याय 6.64: भीमसेन और घटोत्कचका पराक्रम, कौरवोंकी पराजय तथा चौथे दिनके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 64: भीमसेन और घटोत्कचका पराक्रम, कौरवोंकी पराजय तथा चौथे दिनके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  6.64.27 
शल्यं च पञ्चविंशत्या शरैर्विव्याध पाण्डव:।
रुक्मपुङ्खैर्महेष्वास: स विद्धो व्यपयाद् रणात्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर महाधनुर्धर पाण्डुपुत्र भीमसेन ने राजा शल्य को सुवर्णमय पंखवाले पच्चीस बाणों से घायल कर दिया। उन बाणों से घायल होकर वह युद्धभूमि से भाग गया। 27॥
 
Then Bhima, son of Pandu, the great archer, pierced King Salya with twenty-five arrows having golden feathers. Injured by those arrows, he ran away from the battlefield. 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)