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mahabharat 6.64.13-14h: उसके कुलीन और मदोन्मत्त भाई भी कवच ​​धारण किए हुए वहाँ खड़े हैं। आज मैं तुम्हारे सामने ही उन सबको नष्ट कर दूँगा, इसमें संशय नहीं है। अतः हे सारथि! युद्ध में सावधान रहो और मेरे घोड़ों को वश में रखो।॥13 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 6.64: भीमसेन और घटोत्कचका पराक्रम, कौरवोंकी पराजय तथा चौथे दिनके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 64: भीमसेन और घटोत्कचका पराक्रम, कौरवोंकी पराजय तथा चौथे दिनके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  6.64.13-14h 
भ्रातरश्चास्य संनद्धा: कुलपुत्रा मदोत्कटा:।
एतानद्य हनिष्यामि पश्यतस्ते न संशय:॥ १३॥
तस्मान्ममाश्वान् संग्रामे यत्त: संयच्छ सारथे।
 
 
अनुवाद
उसके कुलीन और मदोन्मत्त भाई भी कवच ​​धारण किए हुए वहाँ खड़े हैं। आज मैं तुम्हारे सामने ही उन सबको नष्ट कर दूँगा, इसमें संशय नहीं है। अतः हे सारथि! युद्ध में सावधान रहो और मेरे घोड़ों को वश में रखो।॥13 1/2॥
 
‘His noble and intoxicated brothers are also standing there wearing armour. Today, in front of you, I shall destroy them all, there is no doubt about it. Therefore, charioteer! Be cautious and keep my horses under control in the battle.’॥ 13 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)