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mahabharat 6.64.10-11h: सूत! मेरे मन में वर्षों से जो कामनारूपी वृक्ष है, वह आज पूर्ण होने जा रहा है; क्योंकि इस समय मैं दुर्योधन के भाइयों को यहाँ एकत्र हुआ देख रहा हूँ।   |   mahabharat अध्याय 6.64: भीमसेन और घटोत्कचका पराक्रम, कौरवोंकी पराजय तथा चौथे दिनके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.64.10-11h 
मनोरथद्रुमोऽस्माकं चिन्तितो बहुवार्षिक:॥ १०॥
सफल: सूत चाद्येह योऽहं पश्यामि सोदरान्।
 
 
अनुवाद
सूत! मेरे मन में वर्षों से जो कामनारूपी वृक्ष है, वह आज पूर्ण होने जा रहा है; क्योंकि इस समय मैं दुर्योधन के भाइयों को यहाँ एकत्र हुआ देख रहा हूँ।
 
Suta! The tree of desire which has been in my mind for many years is going to be fulfilled today; because at this time I am seeing Duryodhan's brothers gathered here. 10 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)