श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 63: युद्धस्थलमें प्रचण्ड पराक्रमकारी भीमसेनका भीष्मके साथ युद्ध तथा सात्यकि और भूरिश्रवाकी मुठभेड़  »  श्लोक 9-10
 
 
श्लोक  6.63.9-10 
तस्मिन् सुतुमुले घोरे काले परमदारुणे।
भ्रातरश्चैव पुत्राश्च धृष्टद्युम्नश्च पार्षत:॥ ९॥
द्रौपदेयाऽभिमन्युश्च शिखण्डी चापराजित:।
न प्राजहन् भीमसेनं भये जाते महाबलम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
उस महान् एवं भयंकर भय के समय पराक्रमी भीमसेन, उनके भाई, उनका पुत्र, द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्न, द्रौपदी के पाँचों पुत्र, अभिमन्यु और अपराजित वीर शिखण्डी इनमें से कोई भी नहीं बचा ॥9-10॥
 
At the time of that great and dreadful fear, none of them left the mighty Bhimasena, his brothers, his son, Drupada's son Dhrishtadyumna, Draupadi's five sons, Abhimanyu and the undefeated brave Shikhandi. 9-10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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