श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 63: युद्धस्थलमें प्रचण्ड पराक्रमकारी भीमसेनका भीष्मके साथ युद्ध तथा सात्यकि और भूरिश्रवाकी मुठभेड़  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  6.63.29 
अविध्यदेनं दशभि: पृषत्कै-
रलम्बुषो राक्षसोऽसौ तदानीम्।
शरैश्चतुर्भि: प्रतिविद्धॺ तं च
नप्ता शिनेरभ्यपतद् रथेन॥ २९॥
 
 
अनुवाद
तभी अलम्बुष नामक राक्षस ने उन्हें दस बाणों से घायल कर दिया। तब शिनिके पौत्र ने भी उस राक्षस को चार बाणों से बींधकर बदला लिया और रथ से उतरकर भीष्म पर आक्रमण कर दिया।
 
At that time only a demon named Alambusha wounded him with ten arrows. Then Shinike's grandson also took revenge by piercing that demon with four arrows and attacked Bhishma from the chariot.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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