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mahabharat 6.63.28: भरत! उस समय आपके समस्त सैनिक चाँदी के समान श्वेत घोड़ों पर सवार होकर सुन्दर पंखों से युक्त तीक्ष्ण बाणों की वर्षा करते हुए जा रहे सात्यकि को रोक न सके।   |   mahabharat अध्याय 6.63: युद्धस्थलमें प्रचण्ड पराक्रमकारी भीमसेनका भीष्मके साथ युद्ध तथा सात्यकि और भूरिश्रवाकी मुठभेड़   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.63.28 
तं यान्तमश्वै रजतप्रकाशै:
शरान् वपन्तं निशितान् सुपुङ्खान्।
नाशक्नुवन् धारयितुं तदानीं
सर्वे गणा भारत ये त्वदीया:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
भरत! उस समय आपके समस्त सैनिक चाँदी के समान श्वेत घोड़ों पर सवार होकर सुन्दर पंखों से युक्त तीक्ष्ण बाणों की वर्षा करते हुए जा रहे सात्यकि को रोक न सके।
 
Bhaarata! At that time all your soldiers could not stop Satyaki who was going on silver-like white horses and showering sharp arrows with beautiful feathers. 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)