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mahabharat 6.63.13-14h: पाण्डवपुत्र भीम अपने बड़े वेग से रथों के समूहों को तोड़कर नष्ट कर देते थे, तथा पूरी सेना को उसी प्रकार कुचल देते थे, जैसे हाथी सरकण्डों को रौंदता है।   |   mahabharat अध्याय 6.63: युद्धस्थलमें प्रचण्ड पराक्रमकारी भीमसेनका भीष्मके साथ युद्ध तथा सात्यकि और भूरिश्रवाकी मुठभेड़   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 63: युद्धस्थलमें प्रचण्ड पराक्रमकारी भीमसेनका भीष्मके साथ युद्ध तथा सात्यकि और भूरिश्रवाकी मुठभेड़  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  6.63.13-14h 
ऊरुवेगेन संकर्षन् रथजालानि पाण्डव:॥ १३॥
बलानि सम्ममर्दाशु नड्वलानीव कुञ्जर:।
 
 
अनुवाद
पाण्डवपुत्र भीम अपने बड़े वेग से रथों के समूहों को तोड़कर नष्ट कर देते थे, तथा पूरी सेना को उसी प्रकार कुचल देते थे, जैसे हाथी सरकण्डों को रौंदता है।
 
Pandava's son Bhima would pull apart groups of chariots with his great speed and destroy them, and would quickly trample the entire army like an elephant tramples reed plants.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)