श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 62: धृष्टद्युम्न और शल्य आदि दोनों पक्षके वीरोंका युद्ध तथा भीमसेनके द्वारा गजसेनाका संहार  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  6.62.61 
यमदण्डोपमां गुर्वीमिन्द्राशनिसमस्वनाम्।
अपश्याम महाराज रौद्रां विशसनीं गदाम्॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
महाराज! भीमसेन की भारी और भयानक गदा सबका नाश करने में समर्थ है। हमें तो यह यम की गदा के समान प्रतीत हुई। प्रहार करने पर इसकी ध्वनि इन्द्र के वज्र के समान होती थी। 61.
 
Maharaj! Bhimasena's heavy and dreadful mace is capable of destroying all. To us it looked like the mace of Yama. When struck it made a sound like the thunder of Indra's thunderbolt. 61.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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