vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 6: भीष्म पर्व
»
अध्याय 62: धृष्टद्युम्न और शल्य आदि दोनों पक्षके वीरोंका युद्ध तथा भीमसेनके द्वारा गजसेनाका संहार
»
श्लोक 5
श्लोक
6.62.5
सोऽहं तीव्राणि दु:खानि दुर्योधनकृतानि च।
श्रोष्यामि सततं तात दु:सहानि बहूनि च॥ ५॥
अनुवाद
हे पिता! ऐसा प्रतीत होता है कि दुर्योधन के कारण मुझे सदैव अत्यन्त दुःख और पीड़ा के अनेक वचन सुनने पड़ेंगे।॥5॥
O father, it seems that because of Duryodhan I will always have to listen to many words of extreme sorrow and pain. ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×