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mahabharat 6.62.30-31: महाराज! तत्पश्चात्, रथियों में श्रेष्ठ, शल्य के आक्रमण का बदला लेने की इच्छा से, नकुल और सहदेव ने अपने दोनों भतीजों को अनेक बाणों से पीड़ित कर दिया। उनके बाणों से आच्छादित होने पर भी, नकुल और सहदेव विचलित नहीं हुए।   |   mahabharat अध्याय 6.62: धृष्टद्युम्न और शल्य आदि दोनों पक्षके वीरोंका युद्ध तथा भीमसेनके द्वारा गजसेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 62: धृष्टद्युम्न और शल्य आदि दोनों पक्षके वीरोंका युद्ध तथा भीमसेनके द्वारा गजसेनाका संहार  »  श्लोक 30-31
 
 
श्लोक  6.62.30-31 
तत: शल्यो महाराज स्वस्रीयौ रथिनां वरौ॥ ३०॥
शरैर्बहुभिरानर्च्छत् कृतप्रतिकृतैषिणौ।
छाद्यमानौ ततस्तौ तु माद्रीपुत्रौ न चेलतु:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
महाराज! तत्पश्चात्, रथियों में श्रेष्ठ, शल्य के आक्रमण का बदला लेने की इच्छा से, नकुल और सहदेव ने अपने दोनों भतीजों को अनेक बाणों से पीड़ित कर दिया। उनके बाणों से आच्छादित होने पर भी, नकुल और सहदेव विचलित नहीं हुए।
 
Maharaj! Thereafter, the best among charioteers, wanting to take revenge for the attack made by Shalya, afflicted both his nephews with many arrows. Even after being covered with his arrows, Nakula and Sahadeva were not perturbed. 30-31.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)