श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 62: धृष्टद्युम्न और शल्य आदि दोनों पक्षके वीरोंका युद्ध तथा भीमसेनके द्वारा गजसेनाका संहार  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.62.3 
हीनान् पुरुषकारेण मामकानद्य संजय।
पातितान् पात्यमानांश्च हतानेव च शंससि॥ ३॥
 
 
अनुवाद
संजय! इन दिनों मेरे पुत्र और सैनिक पुरुषार्थहीन हो गए हैं और शत्रुओं ने उन्हें पराजित करके मार डाला है। प्रतिदिन वे शत्रुओं द्वारा मारे जा रहे हैं। आप सदैव उनके विषय में ऐसा ही समाचार देते रहते हैं॥3॥
 
Sanjay! These days my sons and soldiers are lacking in effort and the enemies have defeated and killed them. Every day they are being killed by the enemies. You always give such news about them.॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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