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mahabharat 6.62.20: महाराज! ये सभी योद्धा हर्ष और उत्साह के साथ एक-दूसरे को मार डालने की इच्छा से क्षत्रियों का सामना करते थे। आपकी कुमति के कारण ही ये सभी योद्धा आपस में भिड़ गए।   |   mahabharat अध्याय 6.62: धृष्टद्युम्न और शल्य आदि दोनों पक्षके वीरोंका युद्ध तथा भीमसेनके द्वारा गजसेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.62.20 
अभ्यवर्तन्त संहृष्टा: परस्परवधैषिण:।
ते वै समेयु: संग्रामे राजन् दुर्मन्त्रिते तव॥ २०॥
 
 
अनुवाद
महाराज! ये सभी योद्धा हर्ष और उत्साह के साथ एक-दूसरे को मार डालने की इच्छा से क्षत्रियों का सामना करते थे। आपकी कुमति के कारण ही ये सभी योद्धा आपस में भिड़ गए।
 
King! All of them used to face the Kshatriyas with joy and enthusiasm, with the desire to kill each other. It was because of your bad advice that all these warriors clashed with each other.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)