श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 62: धृष्टद्युम्न और शल्य आदि दोनों पक्षके वीरोंका युद्ध तथा भीमसेनके द्वारा गजसेनाका संहार  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  6.62.2 
नित्यं हि मामकांस्तात हतानेव हि शंससि।
अव्यग्रांश्च प्रहृष्टांश्च नित्यं शंससि पाण्डवान्॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे प्रिय भाई! तुम प्रतिदिन मेरे सैनिकों के मारे जाने की चर्चा करते हो और सदैव कहते हो कि पाण्डव चिन्तारहित और आनन्द से परिपूर्ण हैं॥ 2॥
 
O dear brother, you talk about the death of my soldiers everyday and you always say that the Pandavas are free from anxiety and full of joy.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)