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mahabharat 6.62.14: मद्रराज के रथ के पास पहुँचकर, अत्यन्त क्रोध में भरे हुए तथा असीम आत्मविश्वास से युक्त अर्जुन ने ऋतयान के पुत्र राजा शल्य को अपने तीखे बाणों से घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 6.62: धृष्टद्युम्न और शल्य आदि दोनों पक्षके वीरोंका युद्ध तथा भीमसेनके द्वारा गजसेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 62: धृष्टद्युम्न और शल्य आदि दोनों पक्षके वीरोंका युद्ध तथा भीमसेनके द्वारा गजसेनाका संहार  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.62.14 
ततो मद्राधिपरथं कार्ष्णि: प्राप्यातिकोपन:।
आर्तायनिममेयात्मा विव्याध निशितै: शरै:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
मद्रराज के रथ के पास पहुँचकर, अत्यन्त क्रोध में भरे हुए तथा असीम आत्मविश्वास से युक्त अर्जुन ने ऋतयान के पुत्र राजा शल्य को अपने तीखे बाणों से घायल कर दिया।
 
Reaching near the chariot of the King of Madra, Arjuna, filled with great anger and endowed with infinite self-confidence, wounded King Shalya, son of Ritayan, with his sharp arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)