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mahabharat 6.61.35: तदनन्तर, जैसे शत्रुवीरों का संहार करने वाले महामुनि शालने ने अपने अंकुशों से महान गजराज को मारा था, उसी प्रकार उन्होंने क्रोधपूर्वक तीन बाणों से द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्न को घायल कर दिया ॥35॥   |   mahabharat अध्याय 6.61: अभिमन्युका पराक्रम और धृष्टद्युम्नद्वारा शलके पुत्रका वध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 61: अभिमन्युका पराक्रम और धृष्टद्युम्नद्वारा शलके पुत्रका वध  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  6.61.35 
तत: सांयमनि: क्रुद्ध: पार्षतं परवीरहा।
आजघान त्रिभिर्बाणैस्तोत्रैरिव महाद्विपम्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर, जैसे शत्रुवीरों का संहार करने वाले महामुनि शालने ने अपने अंकुशों से महान गजराज को मारा था, उसी प्रकार उन्होंने क्रोधपूर्वक तीन बाणों से द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्न को घायल कर दिया ॥35॥
 
Then, just as the great mahout Shalane, the slayer of enemy warriors, hit a great Gajraj with his goads, in the same way he wounded Drupada's son Dhrishtadyumna with three arrows in anger. 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)