श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 61: अभिमन्युका पराक्रम और धृष्टद्युम्नद्वारा शलके पुत्रका वध  »  श्लोक 26-27
 
 
श्लोक  6.61.26-27 
तं महौघमिवायान्तं खात् पतन्तमिवोरगम्।
भ्रान्तावरणनिस्त्रिंशं कालोत्सृष्टमिवान्तकम्॥ २६॥
दीप्यमानमिवादित्यं मत्तवारणविक्रमम्।
अपश्यन् पाण्डवास्तत्र धृष्टद्युम्नश्च पार्षत:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
उस युद्ध में पाण्डवों और द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्न ने शलपुत्र को आते देखा, जो उन्मत्त हाथी के समान पराक्रमी और सूर्य के समान तेजस्वी था। वह प्रचण्ड वेग से बहती हुई जलधारा, आकाश से गिरते हुए सर्प और काल द्वारा भेजी हुई मृत्यु के समान प्रतीत हो रहा था। उसके हाथ में नंगी तलवार थी।॥26-27॥
 
In that war, the Pandavas and Dhrishtadyumna, the son of Drupada, saw the son of Shala approaching, as valiant as a mad elephant and as radiant as the Sun. He appeared like a great rushing water current, a serpent falling from the sky and death sent by Kaal. He had a naked sword in his hand.॥26-27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)