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mahabharat 6.61.14-16: हे शत्रुदमन! पिता-पुत्र महारथी अर्जुन और अभिमन्यु को शत्रुओं से घिरा देखकर पांचाल राजकुमार एवं सेनापति धृष्टद्युम्न ने हजारों हाथियों, रथों, लाखों घुड़सवारों और पैदल सैनिकों से युक्त अपनी विशाल सेना को साथ लेकर क्रोधपूर्वक धनुष की टंकार करते हुए मद्रों और केकयों की सेना पर आक्रमण कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 6.61: अभिमन्युका पराक्रम और धृष्टद्युम्नद्वारा शलके पुत्रका वध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 61: अभिमन्युका पराक्रम और धृष्टद्युम्नद्वारा शलके पुत्रका वध  »  श्लोक 14-16
 
 
श्लोक  6.61.14-16 
तौ तु तत्र पितापुत्रौ परिक्षिप्तौ महारथौ।
ददर्श राजन् पाञ्चाल्य: सेनापतिररिंदम॥ १४॥
स वारणरथौघानां सहस्रैर्बहुभिर्वृत:।
वाजिभि: पत्तिभिश्चैव वृत: शतसहस्रश:॥ १५॥
धनुर्विस्फार्य संक्रुद्धो नोदयित्वा च वाहिनीम्।
ययौ तं मद्रकानीकं केकयांश्च परंतप॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुदमन! पिता-पुत्र महारथी अर्जुन और अभिमन्यु को शत्रुओं से घिरा देखकर पांचाल राजकुमार एवं सेनापति धृष्टद्युम्न ने हजारों हाथियों, रथों, लाखों घुड़सवारों और पैदल सैनिकों से युक्त अपनी विशाल सेना को साथ लेकर क्रोधपूर्वक धनुष की टंकार करते हुए मद्रों और केकयों की सेना पर आक्रमण कर दिया।
 
O King of Shatrudaman! Seeing the father-son mighty car-warriors Arjun and Abhimanyu surrounded by the enemies, the Panchala prince and general Dhrishtadyumna, leading his huge army with thousands of elephants and chariots and hundreds of thousands of horse-riders and infantry, angrily twanging his bow, attacked the army of the Madras and the Kekayas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)