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तं व्यालनानाविधगूढसारं
गजाश्वपादातरथौघपक्षम्।
व्यूहं महामेघसमं महात्मा
ददर्श दूरात् कपिराजकेतु:॥ ७॥
अनुवाद
महामनस्वी कपिध्वज अर्जुन ने दूर से ही देखा कि कौरवों की सेना बहुरूपी लग रही थी, क्योंकि वह व्याल नामक सेना में बंधी हुई थी। उसकी शक्ति गुप्त थी। वह हाथियों, घोड़ों, पैदलों और रथियों के समूहों से भरी हुई थी। सेना की वह सेना विशाल बादल के समान प्रतीत हो रही थी।
The great-minded Kapidhwaj Arjun saw from afar that the Kaurava army was looking many-sided because it was bound in a formation called Vyaal. Its power was hidden. It was filled with groups of elephants, horses, infantry and charioteers. That formation of the army looked like a huge cloud.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥