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mahabharat 6.60.3: राजन! यह महान, तेजस्वी, पराक्रमी और महारथी राजा दुर्योधन देवताओं सहित वज्रपाणि इन्द्र के समान शोभा पा रहा था॥3॥   |   mahabharat अध्याय 6.60: चौथे दिन—दोनों सेनाओंका व्यूह-निर्माण तथा भीष्म और अर्जुनका द्वैरथ-युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.60.3 
स तैर्महद्भिश्च महारथैश्च
तेजस्विभिर्वीर्यवद्भिश्च राजन्।
रराज राजा स तु राजमुख्यै-
र्वृत: स देवैरिव वज्रपाणि:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
राजन! यह महान, तेजस्वी, पराक्रमी और महारथी राजा दुर्योधन देवताओं सहित वज्रपाणि इन्द्र के समान शोभा पा रहा था॥3॥
 
Rajan! Surrounded by this great, brilliant, valiant and Maharathi king Duryodhana, he was looking as beautiful as Vajrapani Indra along with the gods. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)