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mahabharat 6.60.29: इस प्रकार, भीष्म और अर्जुन में, जो श्रेष्ठ पुरुष थे, धनुषों की भयंकर टंकार के साथ निर्भय द्वन्द्वयुद्ध आरम्भ हो गया। कौरव, वीर संजय आदि भी उसके साक्षी बने।   |   mahabharat अध्याय 6.60: चौथे दिन—दोनों सेनाओंका व्यूह-निर्माण तथा भीष्म और अर्जुनका द्वैरथ-युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 60: चौथे दिन—दोनों सेनाओंका व्यूह-निर्माण तथा भीष्म और अर्जुनका द्वैरथ-युद्ध  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  6.60.29 
एवंविधं कार्मुकभीमनाद-
मदीनवत् सत्पुरुषोत्तमाभ्याम्।
ददर्श लोक: कुरुसृंजयाश्च
तद् द्वैरथं भीष्मधनंजयाभ्याम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार, भीष्म और अर्जुन में, जो श्रेष्ठ पुरुष थे, धनुषों की भयंकर टंकार के साथ निर्भय द्वन्द्वयुद्ध आरम्भ हो गया। कौरव, वीर संजय आदि भी उसके साक्षी बने।
 
In this manner, a fearless duel began between Bhishma and Arjun, the best of the noble souls, accompanied by the fierce twang of their bows. The Kauravas, the brave Sanjaya and others also witnessed it.
 
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि भीष्मवधपर्वणि भीष्मार्जुनद्वैरथे षष्टितमोऽध्याय:॥ ६०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत भीष्मवधपर्वमें भीष्म और अर्जुनके द्वैरथ-युद्धसे सम्बन्ध रखनेवाला साठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६०॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)