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mahabharat 6.60.23: तत्पश्चात्, अर्जुनपुत्र वीर योद्धा अभिमन्यु, जो समस्त अस्त्र-शस्त्रों का ज्ञाता था और विचित्र स्वर्ण कवच धारण किये हुए था, एक उत्तम रथ पर सवार होकर शीघ्रतापूर्वक वहाँ पहुँचा और उसने उन समस्त कौरव योद्धाओं पर आक्रमण कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 6.60: चौथे दिन—दोनों सेनाओंका व्यूह-निर्माण तथा भीष्म और अर्जुनका द्वैरथ-युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.60.23 
ततो रथानां प्रमुखादुपेत्य
सर्वास्त्रवित् काञ्चनचित्रवर्मा।
जवेन शूरोऽभिससार सर्वां-
स्तानर्जुनस्यात्मसुतोऽभिमन्यु:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, अर्जुनपुत्र वीर योद्धा अभिमन्यु, जो समस्त अस्त्र-शस्त्रों का ज्ञाता था और विचित्र स्वर्ण कवच धारण किये हुए था, एक उत्तम रथ पर सवार होकर शीघ्रतापूर्वक वहाँ पहुँचा और उसने उन समस्त कौरव योद्धाओं पर आक्रमण कर दिया।
 
Thereafter, Abhimanyu, son of Arjuna, a valiant warrior, knowing all the weapons and wearing a strange golden armour, reached there speedily in an excellent chariot and attacked all those Kaurava warriors.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)